शब्दावली

प्रोग्रेसिव ओवरलोड

प्रोग्रेसिव ओवरलोड वह सिद्धांत है, जिसमें मांसपेशी पर पड़ने वाली माँग को - ज़्यादा भार, ज़्यादा दोहराव (रेप्स) या ज़्यादा कठिनाई के ज़रिए - धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है, ताकि वह समय के साथ अनुकूलित होती रहे और मज़बूत बनती रहे। इसके बिना ताक़त की प्रगति रुक जाती है।

यही कारण है कि आउटडोर में उपकरणों का डिज़ाइन इतना मायने रखता है। बॉडीवेट गतिविधियों में लंबे समय तक प्रगति की जा सकती है - कठिन लीवरेज वाले रूपों, धीमे टेम्पो, गति की बड़ी सीमा और एक अंग वाले व्यायामों के ज़रिए - इसलिए वे वर्षों तक ओवरलोड देती रहती हैं। असली सीमा कहीं और है: स्थिर-लीवर स्टेशन आपको केवल वही भार देता है, जो निर्माता ने उसमें बनाया है, और सबसे बढ़कर, भारी प्रेसिंग और निचले शरीर की गतिविधियों को शरीर के वज़न से लोड किया ही नहीं जा सकता, इसलिए उन मांसपेशियों को चुनौती मिलना बंद हो जाती है। समायोज्य भार वाले उपकरण ताक़त बढ़ने के साथ वज़न जोड़ने की सुविधा देकर प्रोग्रेसिव ओवरलोड को बहाल करते हैं - यही कारण है कि यह Outdoor Fitness Club मॉडल और किसी भी गंभीर आउटडोर जिम वर्कआउट प्लान के केंद्र में है।